रागी की खेती: कम पानी में धान से ज्यादा कमाई !

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क्या आप पानी की कमी से परेशान हैं? छत्तीसगढ़ के किसान अब धान के बजाय रागी उगाकर प्रति एकड़ ₹45,000 तक कमा रहे हैं। इस लेख में जानें रागी की उन्नत किस्में, बुवाई का सही समय और सरकारी सहायता प्राप्त करने का तरीका।

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रागी की खेती: कम पानी में धान से ज्यादा कमाई करने का बेहतरीन तरीका

आज के समय में जब खेती में पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, ऐसे में ‘रागी की खेती’ किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र के किसान अब पारंपरिक धान की खेती को छोड़कर रागी (Ragi) की ओर रुख कर रहे हैं।

इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे आप कम लागत और कम पानी में रागी की फसल से जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं।


धान बनाम रागी: पानी की बचत और कम मेहनत

अक्सर गर्मी के मौसम में धान की खेती करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि धान को नियमित रूप से बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, रागी की खेती में पानी की खपत बहुत कम है।

  • पानी का अंतर: जहाँ धान को लगातार पानी चाहिए होता है, वहीं रागी की फसल को केवल 15 दिन के अंतराल पर पानी देने की जरूरत पड़ती है। पूरी फसल के दौरान मात्र 4 बार पानी देना ही पर्याप्त होता है।

  • लागत: रागी में खाद (Fertilizer) और कीटनाशकों का खर्च भी धान के मुकाबले न के बराबर है।

रागी की खेती की विधि (How to Start Ragi Farming)

वीडियो में सफल किसान रोमनाथ साहू और कृषि अधिकारियों ने रागी उगाने के सरल तरीके साझा किए हैं:

  1. बुवाई का समय: गर्मी की फसल के लिए जनवरी का महीना (जैसे 3 जनवरी) बुवाई के लिए उपयुक्त है।

  2. बीज तैयार करना: बीजों को एक रात पानी में भिगोकर रखें और अगले दिन उन्हें निकालकर दबा दें। 24 घंटे के भीतर बीज अंकुरित (जराई) हो जाते हैं।

  3. बुवाई की तकनीक: इसे धान की ‘लाई-चोपी’ विधि की तरह ही खेतों में छिड़काव करके बोया जा सकता है।

  4. किस्म (Varieties): छत्तीसगढ़ में VL Mandwa 376 और VL Mandwa 379 जैसी किस्में बहुत अच्छा परिणाम दे रही हैं।

  5. खाद प्रबंधन: एक एकड़ में लगभग 2 बोरी DAP और आवश्यकतानुसार यूरिया का प्रयोग किया जाता है। ढाई महीने के भीतर खाद का काम पूरा हो जाता है।

मुनाफा और कमाई का गणित

रागी की खेती में लाभ का सबसे बड़ा कारण इसकी कम लागत और सरकार द्वारा दिया जाने वाला समर्थन मूल्य है।

  • पैदावार: प्रति एकड़ लगभग 8 से 10 क्विंटल तक की पैदावार आसानी से मिल जाती है।

  • सरकारी समर्थन: छत्तीसगढ़ सरकार ने रागी के लिए पंजीयन (Registration) की व्यवस्था की है। पिछले वर्ष इसका सरकारी रेट ₹3,577 प्रति क्विंटल के आसपास था, जिससे किसान को बीज उत्पादन के माध्यम से ₹40,000 से ₹45,000 तक का शुद्ध लाभ मिल जाता है।

  • खुला बाजार: यदि आप इसे खुले बाजार में बेचते हैं, तो भी ₹30 से ₹35 प्रति किलो के हिसाब से ₹18,000 से ₹20,000 का मुनाफा प्रति एकड़ हो सकता है।

रोग और रखरखाव

रागी की एक खास बात यह है कि इसमें बीमारियाँ और कीट बहुत कम लगते हैं। 3 साल के अनुभव के आधार पर किसानों का कहना है कि इसमें निंदाई (Weeding) की जरूरत भी बहुत कम पड़ती है, जिससे लेबर खर्च बच जाता है।

कटाई और मिजाई (Harvesting)

रागी की फसल लगभग 110 दिनों में तैयार हो जाती है। इसे हाथ से भी काटा जा सकता है और हार्वेस्टर का उपयोग भी किया जा सकता है। हार्वेस्टर से कटाई करने पर धान की तरह ही अनाज और भूसा अलग हो जाता है।


निष्कर्ष

यदि आप ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहाँ पानी की कमी है या आप धान का एक बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं, तो रागी की खेती आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। यह न केवल कम पानी में तैयार होती है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे ‘सुपरफूड’ माना जाता है, जिससे भविष्य में इसकी मांग और बढ़ने वाली है।

वीडियो देखें: यहाँ क्लिक करें

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