जादुई बगीचा : जहाँ उगते हैं 50 से ज्यादा दुर्लभ फल और फूल
क्या आपने कभी एक ही बाड़ी में रामफल, लक्ष्मण फल और हनुमान फल को एक साथ देखा है? छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक किसान ने अपनी मेहनत से 50 से ज्यादा दुर्लभ और औषधीय पौधों का ऐसा संग्रह तैयार किया है जिसे ‘छोटा स्वर्ग’ कहा जा रहा है। जानिए सेब, बादाम और चंदन उगाने की पूरी कहानी।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित धमधा का एक जादुई बगीचा छोटा सा गांव धर्मपुरा इन दिनों चर्चा में है। यहाँ के प्रगतिशील किसान सोनपाल यादव जी ने अपनी बाड़ी में एक ऐसा ‘फलों का संसार’ बसाया है, जिसे देख लोग इसे ‘छत्तीसगढ़ का स्वर्ग’ कह रहे हैं।
इस बगीचे की सबसे बड़ी खूबी यहाँ मौजूद 50 से भी ज्यादा दुर्लभ प्रजाति के पौधे हैं।
🍎 ठंडे प्रदेशों के फल अब छत्तीसगढ़ के मैदानों में
अक्सर हम सोचते हैं कि सेब या लीची जैसे फल केवल ठंडी जगहों पर होते हैं, लेकिन सोनपाल जी ने इसे गलत साबित कर दिया:
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सेब (Apple): मटासी मिट्टी और तेज गर्मी के बावजूद यहाँ सेब के पेड़ों में गुच्छों में फल आ रहे हैं।
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लीची (Litchi): जशपुर और अंबिकापुर की मशहूर लीची अब धमधा के खेतों की शान बढ़ा रही है।
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काजू और बादाम: बस्तर और रायगढ़ में होने वाला काजू अब यहाँ के आंगन में फलता है।
🥭 औषधीय और ‘पवित्र’ पौधों का संगम
यहाँ केवल फल ही नहीं, बल्कि आस्था और आयुर्वेद से जुड़े दुर्लभ पेड़ भी हैं:
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पारिजात (स्वर्ग का फूल): इसे देवताओं का प्रिय फूल माना जाता है। इसकी खुशबू पूरे बगीचे को महका देती है।
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सफेद और लाल चंदन: पुष्पा फिल्म वाला असली लाल चंदन और कीमती सफेद चंदन यहाँ 10 साल से सुरक्षित बढ़ रहे हैं।
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शमी और बेल: पूजा-पाठ के लिए विशेष महत्व रखने वाले ये पौधे यहाँ पूरी शुद्धता के साथ उगाए गए हैं।
🍍 रामफल से लेकर हनुमान फल तक
सीताफल तो हम सब खाते हैं, पर क्या आपने इनके नाम सुने हैं?
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रामफल: बड़े आकार का और स्वाद में लाजवाब।
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लक्ष्मण फल: कैंसर जैसी बीमारियों में औषधीय रूप से उपयोगी माना जाता है।
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हनुमान फल: देखने में अनोखा और स्वाद में बिल्कुल अलग।
🛠️ कैसे तैयार हुआ यह बगीचा? (सोनपाल जी के टिप्स)
सोनपाल जी ने इन पौधों को बड़े ही वैज्ञानिक और देसी तरीके से पाला है:
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ड्रिलिंग विधि: पौधों को लगाने के लिए मशीन से गहरे छेद किए गए।
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शुद्ध खाद: डीएपी के साथ भारी मात्रा में गोबर खाद का उपयोग किया गया।
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ड्रिप सिंचाई: पानी की बचत और सही पोषण के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया गया है।
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ग्राफ्टिंग का जादू: एक ही गुड़हल के पेड़ पर ग्राफ्टिंग के जरिए सफेद और नारंगी जैसे अलग-अलग रंगों के फूल खिलाए गए हैं।
💚 “बेचने के लिए नहीं, खुशियाँ बांटने के लिए”
सोनपाल जी का उद्देश्य व्यापार करना नहीं है। वे कहते हैं:
“ये सब मैंने अपने शौक और समाज के लिए लगाया है। गांव के बच्चे यहाँ आकर ताजे अंजीर और बादाम खाते हैं। अंतिम संस्कार या पूजा के लिए लोग यहाँ से चंदन और शमी की पत्तियां मुफ्त में ले जाते हैं।”
प्रमुख आकर्षणों की सूची:
| फल/पौधा | खासियत |
| अंजीर | हाइब्रिड वैरायटी, सीधे पेड़ से तोड़कर खाने लायक। |
| कोलकाता कटहल | छोटे पौधे में ही तने से लेकर ऊपर तक फलों की भरमार। |
| ड्रैगन फ्रूट | आधुनिक खेती का शानदार उदाहरण। |
| लौंग और इलायची | खुशबूदार पत्तियां जो मसालों की याद दिलाती हैं। |
धमधा का यह बगीचा हम सभी के लिए एक सीख है कि अगर किसान नई तकनीक और धैर्य के साथ काम करे, तो हमारी धरती सोना उगल सकती है।
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VIDEO LINK – 🍎 ठंडे प्रदेशों के फल अब छत्तीसगढ़ के मैदानों में