कम पानी में पॉलीहाउस जुगाड़ से शिमला मिर्च की खेती

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क्या आप कम पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और फिर भी सब्जियों की आधुनिक खेती से बंपर मुनाफा कमाना चाहते हैं? छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम कुरसूल के किसान राजेश साहू ने एक अनोखा उदाहरण पेश किया है। कम पानी के बावजूद सही वॉटर मैनेजमेंट (Water Management) और पॉलीहाउस तकनीक (Polyhouse Technology) का इस्तेमाल करके वे बड़े पैमाने पर शिमला मिर्च की खेती (Shimla Mirch Farming) कर रहे हैं।

आइए जानते हैं कि कम पानी में पॉलीहाउस और कूलिंग फैन-पैड सिस्टम (Fan-Pad System) के जुगाड़ से शिमला मिर्च की सफल खेती कैसे की जाती है।

1. कम पानी में वॉटर मैनेजमेंट का देशी जुगाड़

राजेश साहू के पास कुल 6 बोरवेल हैं, लेकिन पानी का स्तर कम होने के कारण हर बोरवेल से केवल 1-1 इंच पानी ही मिल पाता है। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने 3 लाख लीटर क्षमता का वाटर स्टोरेज टैंक बनाया है:

  • इरिगेशन टैंक (2,77,000 लीटर capacity): यह लगभग 13 फीट गहरा और 38-40 फीट लंबा-चौड़ा है। इसका इस्तेमाल ड्रिप इरिगेशन के जरिए फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है।

  • फैन-पैड स्टोरेज टैंक (32,000 लीटर capacity): यह पानी पॉलीहाउस के कूलिंग फैन-पैड सिस्टम में रिसाइकल होकर लगातार घूमता रहता है, जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती।

2. पॉलीहाउस में Shimla Mirch Farming के फायदे

शिमला मिर्च का पौधा बाहरी मौसम, अत्यधिक धूप और कीटों के प्रति बहुत संवेदनशील (Sensitive) होता है। खुले खेत की तुलना में पॉलीहाउस में खेती करने के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:

  1. तापमान नियंत्रण (Temperature Control): पॉलीहाउस के अंदर का तापमान बाहर के वातावरण से 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है।

  2. कीटों से बचाव: डबल-डोर (बफर रूम) सिस्टम होने के कारण बाहरी कीट और गर्म हवाएं पॉलीहाउस के अंदर प्रवेश नहीं कर पातीं।

  3. कम खाद और दवा का खर्च: नियंत्रित वातावरण मिलने के कारण पौधों में बीमारियां कम लगती हैं।

3. शिमला मिर्च की बुवाई और बेड प्रिपरेशन (Bed Preparation)

  • रगबा (Area): 1-1 एकड़ के दो पॉलीहाउस शेड बनाए गए हैं।

  • बेसल डोज (Basal Dose): बेड तैयार करने से पहले प्रत्येक 1 एकड़ पॉलीहाउस में 7 टन वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) डाला गया।

  • दूरी और तकनीक:

    • बेड से बेड की दूरी: 5 फीट

    • पौधे से पौधे की दूरी: 1.5 फीट

    • सिंचाई और मल्चिंग: डबल ड्रिप लाइन (Double Drip Line) के साथ मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल।

4. फसल चक्र और उत्पादन समय (Crop Cycle)

  • प्लांटेशन (Plantation): जुलाई के दूसरे सप्ताह (10 से 13 जुलाई) के दौरान नर्सरी से लाकर पौधे रोपे गए।

  • फ्लावरिंग स्टेज (Flowering Stage): रोपाई के लगभग 40-45 दिन बाद पौधे में फूल आने शुरू हो जाते हैं।

  • उत्पादन (Production Time): शिमला मिर्च का पौधा रोपाई के 60 से 70 दिनों के भीतर फल देना शुरू कर देता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

यदि आपके पास पानी का स्रोत सीमित है, तो सही वॉटर स्टोरेज मैनेजमेंट और पॉलीहाउस तकनीक को अपनाकर Shimla Mirch Farming से बेहतरीन उत्पादन लिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के किसानों का यह मॉडल उन सभी किसानों के लिए प्रेरणादायक है जो कम संसाधनों में हाई-टेक खेती करना चाहते हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=6m2C2hVX5Q0

 

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