100 बकरियों के साथ कमर्शियल बकरी पालन: NLM योजना

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ग्रामीण भारत में कमर्शियल बकरी पालन सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाले पशुपालन व्यवसायों में से एक बनता जा रहा है। **राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)** जैसी पहलों के माध्यम से मिलने वाले मजबूत सरकारी समर्थन के कारण, नए उद्यमी अब बड़े पैमाने पर कमर्शियल यूनिट स्थापित कर रहे हैं।

 

इस लेख में हम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड स्थित एक सफल कमर्शियल बकरी पालन फॉर्म का जायजा ले रहे हैं। श्री तिलक राम साहू द्वारा संचालित **’गुडविल गोट फार्म’** में 10 एकड़ के क्षेत्र में एनएलएम योजना के तहत 100 बकरियां और 5 बकरे पाले गए हैं, जो आधुनिक बकरी पालन के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्त्रोत है।

 

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राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) सब्सिडी को सम

 

भारत में बकरी पालन के कारोबार को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने में एनएलएम (राष्ट्रीय पशुधन मिशन) योजना एक क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है। मगरलोड के पशु चिकित्सा सहायक उपसर्जन डॉ. भूपेंद्र सोनी के अनुसार, यह योजना पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान करती है।

 

**प्रोजेक्ट का पैमाना और लागत:** 100 बकरियां और 5 बकरे वाली एक मानक कमर्शियल यूनिट की कुल प्रोजेक्ट लागत लगभग ₹20 लाख होती है, जिसमें सरकार द्वारा **50% सब्सिडी (₹10 लाख तक)** दी जाती है।

 **बड़ी यूनिट्स:** इसके अलावा, बड़ी क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के तहत 200, 300 या 500 बकरियों तक की यूनिट्स का भी प्रावधान है, जिसमें ₹1 करोड़ तक के प्रोजेक्ट पर ₹50 लाख तक की सब्सिडी मिलती है।

**शामिल खर्च:** इस प्रोजेक्ट लागत में शेड का निर्माण, पशुओं की खरीद, दाना-पानी के बर्तन, और अनिवार्य पशु बीमा जैसी सभी आवश्यक चीजें शामिल होती हैं।

 

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 ब्रीड (नस्ल) चयन: स्थानीय नस्लें क्यों हैं बेहतर?

 

पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने और निरंतर विकास सुनिश्चित करने के लिए सही नस्ल का चुनाव करना बहुत जरूरी है। गुडविल गोट फार्म में किसान ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय **अंजोरी नस्ल** और अन्य देसी बकरियों को चुना है।

 

**पर्यावरण के अनुकूल:** स्थानीय नस्लें क्षेत्रीय मौसम और उपलब्ध चारे के हिसाब से खुद ढल जाती हैं, जिससे मृत्यु दर काफी कम हो जाती है।

ब्लैक बंगाल से तुलना:हालांकि अंजोरी नस्ल बच्चे देने के मामले में ब्लैक बंगाल जैसी ही होती है, लेकिन इसकी ऊंचाई (हाइट), शारीरिक स्वास्थ्य और चमक बेहतर होती है।

 

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फार्म प्रबंधन, शेड (आवास) और खान-पान की व्यवस्था

 

इतनी बड़ी संख्या में बकरियों को संभालने के लिए बुनियादी ढांचे, खान-पान और दैनिक देखभाल की उचित योजना की आवश्यकता होती है।

 

 1. शेड और बुनियादी ढांचा

 

गुडविल गोट फार्म में कुल 2,000 वर्ग फीट क्षेत्र में दो हवादार शेड बनाए गए हैं:

 

शेड 1: 1,200 वर्ग फीट (30×40 फीट) में भारी-भरकम पाइप, मजबूत प्लेन बीम और पक्के फाउंडेशन के साथ तैयार किया गया है।

शेड 2:20,000 वर्ग फीट (20×40 फीट) का शेड है।

पार्टीशन:शेड के भीतर गर्भवती बकरियों, छोटे बच्चों और बकरों के लिए अलग-अलग पार्टीशन बनाए गए हैं ताकि किसी प्रकार की चोट या परेशानी न हो।

 

 2. खान-पान की रणनीति (सेमी-स्टॉल फीडिंग)

 

चराई :10 एकड़ के बगीचे और फार्म परिसर में बकरियों को प्राकृतिक घास और पेड़ों की पत्तियों पर दिनभर चराया जाता है।

स्टॉल फीडिंग: शाम के समय बकरियों को मक्का दाना, गेंहू का चोकर, चना भूसी और पैरा घास को काटकर विशेष मिश्रण के रूप में दिया जाता है।

 

 

स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण और बीमा

 

फार्म की लाभप्रदता बनाए रखने के लिए पशुओं का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। गुडविल गोट फार्म में नियमित पशु चिकित्सा सहायता ली जाती है।

 

नियमित टीकाकरण: बकरियों को पीपीआर (PPR), एफएमडी (FMD) और ईटी (ET) जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीके लगाए जाते हैं।

डिवार्मिंग और सप्लीमेंट्स:हर दो महीने में बकरियों की डिवार्मिंग (कृमिनाशक दवा) की जाती है, साथ ही लिवर टोनिक और मिनरल मिक्चर भी दिए जाते हैं।

पशु बीमा: प्राकृतिक आपदाओं या बीमारियों से होने वाले नुकसान से सुरक्षा के लिए सभी बकरियों का बीमा (बजाज इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से) कराया गया है, जिसमें 6% प्रीमियम लागू होता है जो योजना के दायरे में कवर होता है।

 

 

 

निष्कर्ष और विशेषज्ञों की सलाह

 

कमर्शियल क्षेत्र में कदम रखने वाले नए लोगों के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि वे शुरुआत में 100 बकरियों जैसी प्रबंधनीय यूनिट से शुरुआत करें, ताकि बड़े स्तर पर जाने से पहले वे पशुओं के व्यवहार और बाजार को अच्छी तरह समझ सकें। एनएलएम योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी, पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन और अनुशासित फार्म प्रबंधन के साथ बकरी पालन एक बेहद लाभदायक और टिकाऊ व्यवसाय साबित हो सकता है।

 

https://youtu.be/Sl9NIc43H7g18:50:22

 

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